खुशियाँ इतनी कमजोर होती हैं कि बहुत जल्दी मर जाती हैं और गम हमेशा जिन्दा रहता है, चाहे चेतन हो या अवचेतन मन, दर्द हमेशा सही मौके की तलाश में छुपा रहता है। जैसे ही अपने अनुकूल माहौल पाता है बाहर निकल आता है। आप अकेले में बैठ कर मुस्कराने वाले कम लोगों को पाएंगे, अधिकतर लोग अकेले में रोना पसंद करते हैं पुरानी बातों को पुरानी यादों को याद कर के, उनके जुदा होने के अहसास से अक्सर आँखे नम हो जाया करती हैं। गम इकठ्ठा होते रहते हैं, एक गम के साथ हजारों दूसरे गम घेर लेते हैं जबकि खुशियाँ निहायत ही अकेली होती हैं। आप एक ख़ुशी पर एक बार ही खुश हो सकते हो पर गम इतने टिकाऊ होते हैं कि आप एक ही गम को याद कर के बार बार रो सकते हो, दुखी हो सकते हो।
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