रक्त मेरा आज क्यूँ लगने लगा है खौलने
हर दिन, घडी, हर पल लगा है जिंदगी को तौलने
रास्ते हज़ार है तो लाख है रूकावटे
रुकना नहीं है, दिल से मेरे आ रही है आहटें
आहटों में मुझको मेरा अक्स है पुकारता
रुक ना जाऊं, थक ना जाऊं, बस यही है चाहता
चलना है मुझको अनवरत, मंजिल की राह अब चुनूँ मैं
कोई ऐसा काम करूँ मैं, एक मरुँ एक लाख बनूँ मैं
दुनिया के सारे रास्तों की अब हदों को तोड़ दूँ
इंसान को इंसानियत से अब सदा को जोड़ दूँ
जोड़ दूँ बिखरे हुए बैठें हैं अब जो राह मे,
हौसलों को छोड़ कर मंजिल की है जो चाह मैं
आसमां को पाने की ललक जो उनमे डाल दूँ
बिखरे हुए सुरों से सबको एक नई मैं ताल दूँ
नींद से जागा हूँ अब तो, अब कोई तो ख्वाब बुनूँ मैं
कोई ऐसा काम करूँ मैं, एक मरुँ एक लाख बनूँ मैं
जिंदगी है नाम जीने का, नहीं है काटना
काटना है अब ग़मों को, जिंदगी है बाटना
जिंदगी है देश की, अब देश पे लुटाऊं मैं
ख्वाब तिरंगे को अब कफ़न मेरा बनाऊं मैं
मिट भी जाये सांस मेरी, अब वतन के वास्ते
देशभक्तों संग चलूँ मैं, मेरे अंतिम रास्ते
आखिरी मुकाम पे मिटटी हो, इन्कलाब बनूँ मैं
कोई ऐसा काम करूँ मैं, एक मरुँ एक लाख बनूँ मैं
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