ना गुजरी बाते कहता हूँ, ना बीते सपने बुनता हूँ...
मैं समय का बहता दरिया हूँ, बस आज के पल में रहता हूँ...
कहना सुनना सब हो ही चुका, बाकी न कुछ भी रखता हूँ..
खुली हुई किताब हूँ मैं, पर्दों में ना खुद को रखता हूँ..
होता है सब अच्छा ही सदा, यह बात दिल में रखता हूँ..
फूलो का मैं एक बाग़ हूँ जो, काटों की जगह भी रखता हूँ...
बीते लम्हों पर रोने का, वक़्त नहीं रखता हूँ मैं..
आँखों में सपने जीवन के और दिल में जज्बा रखता हूँ..
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