सब कुछ है तो
सही मगर लगता जैसे कुछ भी नहीं
क्या तुम ही हो मेरी सब कुछ, क्या तुम
बिन मैं नहीं
यादों में तो हो, मेरी बातों में भी हो
मेरी जीने की वजह क्या तुम बिन कुछ नहीं
हर लम्हा मुझमे तुम, जीता हूँ संग तुम्हारे
मिलना हो या ना हो, चाहे जीते दिल या हारे
रहोगी तुम आखिर तक, साँसे हैं मेरी जब तक
सुनती हो मेरी बातें, पर क्यूँ कहती कुछ नहीं
चाहे हूँ नहीं मैं अब तो,
तेरी जिंदगी
में शामिल
शायद देर कर दी मैंने, बनने के तेरे काबिल
अफ़सोस क्यूँ करूँ मैं तेरे
जुदा होने का
क्या बिन मिले भी उम्र भर, ये प्यार कुछ नहीं
चल करते हैं अब ये सौदा हम पूरी जिंदगी का
तेरी यादे मेरा जीवन, मेरा दिल, तुम धड़कन
तेरा सब कुछ, मेरी तुम, उन तस्वीरों में हम तुम
रातें मेरी ख्वाब तेरे, ख़्वाबों में तू पास मेरे
हर चेहरे में तू हो बस, देखूँ मैं खुद को भी जब
इतना सब कुछ तो है अब फिर भी
तू जो पास नहीं
सब कुछ है तो सही मगर लगता जैसे कुछ भी
नहीं
पर खुश हूँ अपनी दुनिया में,चाहूँ अब मैं कुछ भी नहीं
चाहूँ अब मैं कुछ भी नहीं
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