मैं कब से वो नज़र तलाश करता हूँ
ना जाने कब से तेरा इंतज़ार करता हूँ।
दिल में आये तो दरिया हो जाए
कब से वो बाकियों को दरकिनार करता हूँ।
तेरा चेहरा चाहे जुदा हो सबसे जहां में
मगर हर शख्स में तेरा ही दीदार करता हूँ।
जो मिल जाओ तुम तो मुकम्मल हो जहां
बस तुम्हारा ही यहाँ ऐतबार करता हूँ।
ना जाने कब से तेरा इंतज़ार करता हूँ।
दिल में आये तो दरिया हो जाए
कब से वो बाकियों को दरकिनार करता हूँ।
तेरा चेहरा चाहे जुदा हो सबसे जहां में
मगर हर शख्स में तेरा ही दीदार करता हूँ।
जो मिल जाओ तुम तो मुकम्मल हो जहां
बस तुम्हारा ही यहाँ ऐतबार करता हूँ।
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