पहले तुम थी अब ये तन्हाई है
मगर तन्हाई भी तो तुम्हे ही लाई है
बन गई है मेरी
साँसों की तरह
कुछ रहे न रहे ये रहेगी
आखिरी दम तक
बेशक ज़माने ने छीन लिया है तुम्हे मुझसे
मगर ना छीन सकेगा
इस तन्हाई को
और उसमे बसी हुई तुमको
... पहले भी तुम थी,
अभी भी तुम हो
फर्क सिर्फ इतना है कि अब
सिर्फ तुम सुनती हो
कहती कुछ नहीं
कुछ पूछता हूँ तुमसे
तो याद दिला देती हो कोई गुजरी बात
और मुझे मिल जाता है
मेरे हर सवाल का जवाब
मगर तन्हाई भी तो तुम्हे ही लाई है
बन गई है मेरी
साँसों की तरह
कुछ रहे न रहे ये रहेगी
आखिरी दम तक
बेशक ज़माने ने छीन लिया है तुम्हे मुझसे
मगर ना छीन सकेगा
इस तन्हाई को
और उसमे बसी हुई तुमको
... पहले भी तुम थी,
अभी भी तुम हो
फर्क सिर्फ इतना है कि अब
सिर्फ तुम सुनती हो
कहती कुछ नहीं
कुछ पूछता हूँ तुमसे
तो याद दिला देती हो कोई गुजरी बात
और मुझे मिल जाता है
मेरे हर सवाल का जवाब
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