Tuesday, 16 April 2013

चुनाव आते ही


मुझे पता है तुम
वही करोगे फिर से
चुनाव आते ही
वही वादे फिर से,
वही घोषणाएं फिर से
मगर नहीं समझोगे कि
दिल तोड़कर जोड़ने से
रह जाती है दरारें
झांकते हैं जिनमे से
जख्म, दर्द, हर वक्त
तन पर कपड़ा डालने से
नहीं लौट आती लुटी आबरू
ना ही अब खाना देने से
पायेगी लौट कर
उन भूखी रातों की नींद
तुम समर्थ हो
सब कुछ भूल कर
मुस्कुराने में
मगर हमने तो सहा है सब
कैसे भूलेंगे हर पल
टूटते सपनो को
अपनी मजबूरियों को
भूख से नीचे दब कर
देश के लिए कुछ ना
कर पाने की बेबसी को
मगर तुम नहीं समझोगे ये सब
करोगे ढोंग अच्छे बनने का फिर से
और भी सब कुछ वही फिर से
जो करते हो हर बार
चुनाव आते ही

Sunday, 14 April 2013

मेरे रेल का सफ़र


बाहर शोर शराबा, भीतर एक सन्नाटा
जैसे दर्शक बन कर सफ़र ये मैंने काटा
सब कुछ जैसे आतुर, दिल में बस जाने को
कोशिश कर रहे हैं मुझमे मिल जाने को
अजनबी सारे चेहरे, नकाब रखे हैं पहने
चेहरों से ज्यादा सबके चमक रहे हैं गहने
नकली मुस्कान लगाए हर बात पे आँख मिलाये
सच्चाई जान कर भी, दिल कैसे यकीं लुटाये
व्यस्त अपनी अपनी पीड़ा सब कहने में
वीर बड़े हैं लगते, तकलीफें सब सहने में
हालत साझा कर के साझा ढानढस बंधाते
परिवार से भी ज्यादा खुद अपना स्नेह लुटाते
कैसे कह रहे हैं, सब अपनी निज गाथाएँ
कोशिश में हैं जैसे, सबकी आँखों में छा जाएँ
कौन करेगा याद कल इनमे से किसी को
फिर मिल भी ना पाएंगे जिंदगी में कभी तो
कितना सच, कितना झूठ, कोई नहीं बुझेगा
मेरा मैं तो जानूं, फिर क्यों पूछूं दूजे का
कुछ सफ़र ख़त्म करते हैं, कुछ उनकी जगह हैं लेते
शामिल होते सबकी आधी बातों के बीच में से
कोई साफ़ करेगा फर्श, अपने मैले कपड़ों से
साफ़ करके बोलेगा ना, मांगेगा बस नज़रों से
कोई करेगा मेहनत कुछ चीजें बेचने की
रुक, बाट देख लेगा, बच्चों के देखने की
लगता है जैसे जीवन भी होता है एक सफ़र ही
तय करना है अकेले, होगा ना हमसफ़र भी
लम्हें, लोग, साथी, आयेंगे जायेंगे
बस उनकी बातें, किस्से, निशां रह जायेंगे
गम, ख़ुशी, वादे , कुछ खट्टी, मीठी यादें
कुछ उनमे रह जायेंगे, कुछ मुझमे रह जायेंगे
कुछ उनमे रह जायेंगे, कुछ मुझमे रह जायेंगे

Thursday, 11 April 2013

हर पल मैं ही

दिल परेशां सा फिर हुआ है आज 
कहीं तुमने कुछ कहा तो नहीं दिल में 
एक आवाज़ आई है कानों में मेरे 
कहीं तुमको कुछ कहा तो नहीं किसी ने 
लब खामोश हैं मगर दिल धड़क रहा है 
जैसे लहरें उठ रही हो दूर गगन में कहीं 
तुम पास हो तो सही मगर पास नहीं 
चाह कर भी कुछ ना कर पाऊं मैं 
मगर तेरे दिल की धडकनों में शामिल
हर पल मैं ही 
हर पल मैं ही